उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भगति हीन बिरंचि किन होई। सब जीवहु सम प्रिय मोहि सोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभक्तिहीन ब्रह्मा ही क्यों न हो, वह मुझे सब जीवोंके समान ही प्रिय है। परन्तु भक्तिमान् अत्यन्त नीच भी प्राणी मुझे प्राणोंके समान प्रिय है, यह मेरी घोषणा है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 988 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भगति हीन बिरंचि किन होई। सब जीवहु सम प्रिय मोहि सोई।।
भगतिवंत अति नीचउ प्रानी। मोहि प्रानप्रिय असि मम बानी।।
स्रोत अभिलेख 7.86 · पुस्तक पृ. 988, 988
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1भगति हीन बिरंचि किन होई। सब जीवहु सम प्रिय मोहि सोई।।
English explanation
Even if someone without devotion is Brahma himself, he is dear to me only as all other beings are.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति से | of devotion |
| हीन | रहित | devoid |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| किन | ही क्यों न | even if |
| होई | हो | be |
| सब | सभी | all |
| जीवहु | अन्य जीवों | other beings |
| सम | के समान | like |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोहि | मुझे | to me |
| सोई | वही | that very one |
2 भगतिवंत अति नीचउ प्रानी। मोहि प्रानप्रिय असि मम बानी।।
English explanation
A being endowed with devotion, even if considered extremely lowly, is as dear to me as life itself—such is my declaration.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगतिवंत | भक्ति से युक्त | endowed with devotion |
| अति | अत्यंत | extremely |
| नीचउ | नीचा भी | even lowly |
| प्रानी | प्राणी | being |
| मोहि | मुझे | to me |
| प्रानप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | as dear as life itself |
| असि | ऐसी | such |
| मम | मेरी | my |
| बानी | वाणी | declaration |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 988
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 988, 988
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।