उत्तरकाण्ड · दोहा 86 · दोहा
सुचि सुसील सेवक सुमति प्रिय कहु काहि न लाग।
सुचि सुसील सेवक सुमति प्रिय कहु काहि न लाग।
श्रुति पुरान कह नीति असि सावधान सुनु काग॥ ८६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.86 · पुस्तक पृ. 988, 988
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुचि सुसील सेवक सुमति प्रिय कहु काहि न लाग।
एआई प्रारूप: कहो, पवित्र, सुशील और सद्बुद्धि वाला सेवक किसे प्रिय नहीं लगता?
English explanation
AI draft: Tell me, who would not find a pure, well-mannered, wise servant dear?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुचि | पवित्र; शुद्ध आचरण वाला | pure; upright in conduct |
| सुसील | सुशील; अच्छे स्वभाव वाला | well-mannered; of good character |
| सेवक | सेवा करने वाला | servant; one who serves |
| सुमति | अच्छी बुद्धि वाला | wise; possessing sound judgment |
| प्रिय | प्यारा | dear; beloved |
| कहु | कहो; बताओ | tell me; say |
| काहि | किसे | to whom |
| न | नहीं | not |
| लाग | लगता है | seems; is found to be |
2श्रुति पुरान कह नीति असि सावधान सुनु काग॥ ८६॥
एआई प्रारूप: वेद और पुराण ऐसी नीति कहते हैं; हे काग, ध्यान से सुनो।
English explanation
AI draft: The Vedas and Puranas teach this principle; listen attentively, O crow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रुति | वेद | the Vedas; revealed scriptures |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| कह | कहते हैं | say; teach |
| नीति | आचरण का सिद्धांत | principle of conduct |
| असि | ऐसी | such; this kind of |
| सावधान | ध्यानपूर्वक; सजग होकर | attentively; with alertness |
| सुनु | सुनो | listen |
| काग | हे काग; हे काकभुशुण्डि | O crow; O Kakabhushundi |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 86
- स्रोत अभिलेख
- 7.86
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 988, 988
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।