उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भगतिहि ग्यानहि नहिं कछु भेदा। उभय हरहिं भव संभव खेदा।।
मूल पाठ
भगतिहि ग्यानहि नहिं कछु भेदा। उभय हरहिं भव संभव खेदा।।
नाथ मुनीस कहहिं कछु अंतर। सावधान सोउ सुनु बिहंगबर।।
स्रोत अभिलेख 7.115 · पुस्तक पृ. 1023, 1024
भावार्थ
मूल पाठ के बादभक्ति और ज्ञानमें कुछ भी भेद नहीं है। दोनों ही संसारसे उत्पन्न क्लेशोंको हर लेते हैं। हे नाथ! मुनीश्वर इनमें कुछ अन्तर बतलाते हैं। हे पक्षिश्रेष्ठ! उसे सावधान होकर सुनिये॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1024 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भगतिहि ग्यानहि नहिं कछु भेदा। उभय हरहिं भव संभव खेदा।।
English explanation
There is no difference between devotion and knowledge: both remove the sorrows arising from worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगतिहि | भक्ति में | in devotion |
| ग्यानहि | ज्ञान में | in knowledge |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कोई | any |
| भेदा | भेद | difference |
| उभय | दोनों | both |
| हरहिं | दूर करते हैं | remove |
| भव | संसार से | from worldly existence |
| संभव | उत्पन्न | arising |
| खेदा | दुख | sorrows |
2 नाथ मुनीस कहहिं कछु अंतर। सावधान सोउ सुनु बिहंगबर।।
English explanation
My lord, eminent sages describe some distinction; finest of birds, listen carefully to that too.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| मुनीस | श्रेष्ठ मुनि | eminent sages |
| कहहिं | कहते हैं | describe |
| कछु | कुछ | some |
| अंतर | अंतर | distinction |
| सावधान | ध्यानपूर्वक | attentively |
| सोउ | उसे भी | that too |
| सुनु | सुनो | listen to |
| बिहंगबर | हे श्रेष्ठ पक्षी गरुड़ | O Garuda, finest of birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1024
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1023, 1024
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।