उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ग्यानहि भगतिहि अंतर केता। सकल कहहु प्रभु कृपा निकेता।।
मूल पाठ
ग्यानहि भगतिहि अंतर केता। सकल कहहु प्रभु कृपा निकेता।।
सुनि उरगारि बचन सुख माना। सादर बोलेउ काग सुजाना।।
स्रोत अभिलेख 7.115 · पुस्तक पृ. 1023, 1024
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे कृपाके धाम! हे प्रभो! ज्ञान और भक्तिमें कितना अन्तर है? यह सब मुझसे कहिये। गरुडज़ीके वचन सुनकर सुजान काकभुशुण्डिजीने सुख माना और आदरके साथ कहा—॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1024 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 ग्यानहि भगतिहि अंतर केता। सकल कहहु प्रभु कृपा निकेता।।
English explanation
How much difference is there between knowledge and devotion? Master, abode of compassion, explain it all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यानहि | ज्ञान में | in knowledge |
| भगतिहि | भक्ति में | in devotion |
| अंतर | अंतर | difference |
| केता | कितना | how much |
| सकल | सब | everything |
| कहहु | कहिए | explain |
| प्रभु | हे प्रभु | O master |
| कृपा | कृपा के | of compassion |
| निकेता | हे धाम | O abode |
2 सुनि उरगारि बचन सुख माना। सादर बोलेउ काग सुजाना।।
English explanation
Hearing Garuda's words, the wise crow Bhusundi felt joy and spoke respectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| उरगारि | सर्पों के शत्रु गरुड़ के | of Garuda, enemy of serpents |
| बचन | वचन | words |
| सुख | सुख | joy |
| माना | अनुभव किया | felt |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| बोलेउ | बोले | spoke |
| काग | कौए भुशुंडि | the crow Bhusundi |
| सुजाना | सुजान | wise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1024
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1023, 1024
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।