उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं संत मुनि बेद पुराना। नहिं कछु दुर्लभ ग्यान समाना।।
मूल पाठ
कहहिं संत मुनि बेद पुराना। नहिं कछु दुर्लभ ग्यान समाना।।
सोइ मुनि तुम्ह सन कहेउ गोसाईं। नहिं आदरेहु भगति की नाईं।।
स्रोत अभिलेख 7.115 · पुस्तक पृ. 1023, 1024
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंत, मुनि, वेद और पुराण यह कहते हैं कि ज्ञानके समान दुर्लभ कुछ भी नहीं है। हे गोसाईं! वही ज्ञान मुनिने आपसे कहा, परन्तु आपने भक्तिके समान उसका आदर नहीं किया॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1024 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहहिं संत मुनि बेद पुराना। नहिं कछु दुर्लभ ग्यान समाना।।
English explanation
Saints, sages, the Vedas, and the Puranas say that nothing is as hard to attain as spiritual knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | say |
| संत | संत | saints |
| मुनि | मुनि | sages |
| बेद | वेद | the Vedas |
| पुराना | पुराण | the Puranas |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | anything |
| दुर्लभ | दुर्लभ | hard to attain |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान के | spiritual knowledge |
| समाना | समान | equal to |
2 सोइ मुनि तुम्ह सन कहेउ गोसाईं। नहिं आदरेहु भगति की नाईं।।
English explanation
Master, the sage spoke to you of that very knowledge, yet you did not esteem it as you did devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही ज्ञान | that very knowledge |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| तुम्ह | आप | you |
| सन | से | to |
| कहेउ | कहा था | spoke of |
| गोसाईं | हे स्वामी | O master |
| नहिं | नहीं | not |
| आदरेहु | आपने आदर दिया | you esteemed |
| भगति | भक्ति | devotion |
| की | के | of |
| नाईं | समान | in the same manner |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1024
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1023, 1024
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।