उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनेउँ पुनीत राम गुन ग्रामा। तुम्हरी कृपाँ लहेउँ बिश्रामा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमैंने आपकी कृपासे श्रीरामचन्द्रजीके पवित्र गुणसमूहोंको सुना और शान्ति प्राप्त की। हे प्रभो! अब मैं आपसे एक बात और पूछता हूँ। हे कृपासागर! मुझे समझाकर कहिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1023 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनेउँ पुनीत राम गुन ग्रामा। तुम्हरी कृपाँ लहेउँ बिश्रामा।।
एक बात प्रभु पूँछउँ तोही। कहहु बुझाइ कृपानिधि मोही।।
स्रोत अभिलेख 7.115 · पुस्तक पृ. 1023, 1024
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनेउँ पुनीत राम गुन ग्रामा। तुम्हरी कृपाँ लहेउँ बिश्रामा।।
English explanation
I heard of Rama's many sacred virtues and, through your grace, found peace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनेउँ | मैंने सुना | I heard |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| ग्रामा | समूह | multitude |
| तुम्हरी | आपकी | your |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| लहेउँ | मैंने पाया | I attained |
| बिश्रामा | शांति | peace |
2 एक बात प्रभु पूँछउँ तोही। कहहु बुझाइ कृपानिधि मोही।।
English explanation
Master, let me ask you one question; treasury of compassion, explain it to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बात | बात | question |
| प्रभु | हे प्रभु | O master |
| पूँछउँ | मैं पूछूँ | let me ask |
| तोही | आपसे | you |
| कहहु | कहिए | tell |
| बुझाइ | समझाकर | with an explanation |
| कृपानिधि | हे कृपा के भंडार | O treasury of compassion |
| मोही | मुझे | to me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1023
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1023, 1024
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।