उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि भसुंडि के बचन भवानी। बोलेउ गरुड़ हरषि मृदु बानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[शिवजी कहते हैं—] हे भवानी! भुशुण्डिके वचन सुनकर गरुडज़ी हर्षित होकर कोमल वाणीसे बोले—हे प्रभो! आपके प्रसादसे मेरे हृदयमें अब सन्देह, शोक, मोह और भ्रम कुछ भी नहीं रह गया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1023 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि भसुंडि के बचन भवानी। बोलेउ गरुड़ हरषि मृदु बानी।।
तव प्रसाद प्रभु मम उर माहीं। संसय सोक मोह भ्रम नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.115 · पुस्तक पृ. 1023, 1024
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1सुनि भसुंडि के बचन भवानी। बोलेउ गरुड़ हरषि मृदु बानी।।
English explanation
O Bhavani, hearing Bhusundi's words, Garuda rejoiced and spoke gently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| भसुंडि | काकभुशुंडि, कौए के रूप में रामभक्त | Bhusundi, the crow devotee of Rama |
| के | के | of |
| बचन | वचन | words |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, Parvati |
| बोलेउ | बोले | spoke |
| गरुड़ | गरुड़, पक्षिराज | Garuda, king of birds |
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
2 तव प्रसाद प्रभु मम उर माहीं। संसय सोक मोह भ्रम नाहीं।।
English explanation
Master, through your grace, doubt, sorrow, attachment, and confusion no longer remain in my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपकी | your |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| प्रभु | हे प्रभु | O master |
| मम | मेरे | my |
| उर | हृदय | heart |
| माहीं | में | in |
| संसय | संशय | doubt |
| सोक | शोक | sorrow |
| मोह | मोह | delusive attachment |
| भ्रम | भ्रम | confusion |
| नाहीं | नहीं है | is absent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1023
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1023, 1024
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