उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु खगेस हरि भगति बिहाई। जे सुख चाहहिं आन उपाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे पक्षिराज! सुनिये, जो लोग श्रीहरिकी भक्तिको छोड़कर दूसरे उपायोंसे सुख चाहते हैं, वे मूर्ख और जड़ करनीवाले (अभागे) बिना ही जहाजके तैरकर महासमुद्रके पार जाना चाहते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1023 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनु खगेस हरि भगति बिहाई। जे सुख चाहहिं आन उपाई।।
ते सठ महासिंधु बिनु तरनी। पैरि पार चाहहिं जड़ करनी।।
स्रोत अभिलेख 7.115 · पुस्तक पृ. 1023, 1024
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1सुनु खगेस हरि भगति बिहाई। जे सुख चाहहिं आन उपाई।।
English explanation
Listen, king of birds! Those who abandon devotion to Hari and seek happiness through other means—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| हरि | भगवान हरि की | to the Lord Hari |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बिहाई | छोड़कर | having abandoned |
| जे | जो लोग | those who |
| सुख | सुख | happiness |
| चाहहिं | चाहते हैं | seek |
| आन | अन्य | other |
| उपाई | उपायों से | through means |
2ते सठ महासिंधु बिनु तरनी। पैरि पार चाहहिं जड़ करनी।।
English explanation
Those fools wish to swim across the vast ocean without a boat—an unwise undertaking.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those people |
| सठ | मूर्ख | fools |
| महासिंधु | विशाल समुद्र | the vast ocean |
| बिनु | बिना | without |
| तरनी | नाव | a boat |
| पैरि | तैरकर | by swimming |
| पार | पार होना | to cross |
| चाहहिं | चाहते हैं | wish |
| जड़ | मूर्खतापूर्ण | foolish |
| करनी | करनी | undertaking |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1023
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1023, 1024
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।