उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे असि भगति जानि परिहरहीं। केवल ग्यान हेतु श्रम करहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो भक्तिकी ऐसी महिमा जानकर भी उसे छोड़ देते हैं और केवल ज्ञानके लिये श्रम (साधन) करते हैं, वे मूर्ख घरपर खड़ी हुई कामधेनुको छोड़कर दूधके लिये मदारके पेड़को खोजते फिरते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1023 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जे असि भगति जानि परिहरहीं। केवल ग्यान हेतु श्रम करहीं।।
ते जड़ कामधेनु गृहँ त्यागी। खोजत आकु फिरहिं पय लागी।।
स्रोत अभिलेख 7.115 · पुस्तक पृ. 1023, 1024
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1जे असि भगति जानि परिहरहीं। केवल ग्यान हेतु श्रम करहीं।।
English explanation
Those who knowingly abandon such devotion and labor only to attain spiritual knowledge—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| असि | ऐसी | such |
| भगति | भक्ति | devotion |
| जानि | जानते हुए | knowingly |
| परिहरहीं | छोड़ देते हैं | abandon |
| केवल | केवल | only |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान | spiritual knowledge |
| हेतु | के लिए | for the sake of |
| श्रम | परिश्रम | effort |
| करहीं | करते हैं | make |
2ते जड़ कामधेनु गृहँ त्यागी। खोजत आकु फिरहिं पय लागी।।
English explanation
Those fools abandon the wish-fulfilling cow at home and wander in search of a milkweed plant for milk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those people |
| जड़ | मूर्ख | fools |
| कामधेनु | इच्छाएँ पूरी करने वाली दिव्य गाय | the wish-fulfilling divine cow |
| गृहँ | घर में | at home |
| त्यागी | छोड़कर | having abandoned |
| खोजत | खोजते हुए | searching for |
| आकु | आक का पौधा | the milkweed plant |
| फिरहिं | घूमते हैं | wander |
| पय | दूध | milk |
| लागी | के लिए | for |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1023
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1023, 1024
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।