उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भए कालबस जब पितु माता। मैं बन गयउँ भजन जनत्राता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजब पिता-माता कालवश हो गये (मर गये), तब मैं भक्तोंकी रक्षा करनेवाले श्रीरामजीका भजन करनेके लिये वनमें चला गया। वनमें जहाँ-जहाँ मुनीश्वरोंके आश्रम पाता, वहाँ-वहाँ जा- जाकर उन्हें सिर नवाता॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1015 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भए कालबस जब पितु माता। मैं बन गयउँ भजन जनत्राता।।
जहँ जहँ बिपिन मुनीस्वर पावउँ। आश्रम जाइ जाइ सिरु नावउँ।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 1014, 1016
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भए कालबस जब पितु माता। मैं बन गयउँ भजन जनत्राता।।
English explanation
When my parents died, I went to the forest to worship Rama, protector of his people.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| कालबस | मृत्यु के वश में | subject to death |
| जब | जब | when |
| पितु | पिता | father |
| माता | माता | mother |
| मैं | मैं | I |
| बन | वन में | to the forest |
| गयउँ | चला गया | went |
| भजन | भजन करने | to worship |
| जनत्राता | जनों के रक्षक राम का | Rama, protector of his people |
2 जहँ जहँ बिपिन मुनीस्वर पावउँ। आश्रम जाइ जाइ सिरु नावउँ।।
English explanation
Wherever I found great sages in the forest, I visited their hermitages and bowed my head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | wherever |
| जहँ | जहाँ भी | in each place |
| बिपिन | वन में | in the forest |
| मुनीस्वर | श्रेष्ठ मुनियों को | great sages |
| पावउँ | मैं पाता था | I would find |
| आश्रम | उनके आश्रम में | to their hermitages |
| जाइ | जाकर | going |
| जाइ | हर बार जाकर | visiting each time |
| सिरु | सिर | my head |
| नावउँ | मैं झुकाता था | I would bow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1015
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1014, 1016
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।