उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहु खगेस अस कवन अभागी। खरी सेव सुरधेनुहि त्यागी।।
मूल पाठ
कहु खगेस अस कवन अभागी। खरी सेव सुरधेनुहि त्यागी।।
प्रेम मगन मोहि कछु न सोहाई। हारेउ पिता पढ़ाइ पढ़ाई।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 1014, 1016
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे गरुडज़ी! कहिये, ऐसा कौन अभागा होगा जो कामधेनुको छोड़कर गदहीकी सेवा करेगा? प्रेममें मग्र रहनेके कारण मुझे कुछ भी नहीं सुहाता। पिताजी पढ़ा-पढ़ाकर हार गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1015 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहु खगेस अस कवन अभागी। खरी सेव सुरधेनुहि त्यागी।।
English explanation
Tell me, king of birds, who would be so unfortunate as to abandon the wish-fulfilling divine cow and serve a she-ass?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहु | कहिए | tell me |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| अस | ऐसा | such |
| कवन | कौन | who |
| अभागी | दुर्भाग्यशाली | unfortunate |
| खरी | गधी की | a she-ass |
| सेव | सेवा करे | would serve |
| सुरधेनुहि | देवगाय कामधेनु को | the wish-fulfilling divine cow |
| त्यागी | त्यागकर | having abandoned |
2 प्रेम मगन मोहि कछु न सोहाई। हारेउ पिता पढ़ाइ पढ़ाई।।
English explanation
Absorbed in love, I found nothing else appealing; my father grew weary and gave up after repeatedly teaching me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | राम के प्रति प्रेम में | in love for Rama |
| मगन | मग्न | absorbed |
| मोहि | मुझे | to me |
| कछु | कुछ भी | anything else |
| न | नहीं | not |
| सोहाई | अच्छा लगता था | was appealing |
| हारेउ | थककर हार गए | grew weary and gave up |
| पिता | पिता | my father |
| पढ़ाइ | पढ़ाते | teaching |
| पढ़ाई | बार-बार पढ़ाते हुए | teaching repeatedly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1015
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1014, 1016
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।