उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रौढ़ भएँ मोहि पिता पढ़ावा। समझउँ सुनउँ गुनउँ नहिं भावा।।
मूल पाठ
प्रौढ़ भएँ मोहि पिता पढ़ावा। समझउँ सुनउँ गुनउँ नहिं भावा।।
मन ते सकल बासना भागी। केवल राम चरन लय लागी।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 1014, 1016
भावार्थ
मूल पाठ के बादसयाना होनेपर पिताजी मुझे पढ़ाने लगे। मैं समझता, सुनता और विचारता, पर मुझे पढऩा अच्छा नहीं लगता था। मेरे मनसे सारी वासनाएँ भाग गयीं। केवल श्रीरामजीके चरणोंमें लव लग गयी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1015 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रौढ़ भएँ मोहि पिता पढ़ावा। समझउँ सुनउँ गुनउँ नहिं भावा।।
English explanation
When I grew older, my father taught me. I understood, listened, and reflected, but the studies did not appeal to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रौढ़ | बड़ा; अधिक उम्र का | older; grown |
| भएँ | होने पर | upon becoming |
| मोहि | मुझे | me |
| पिता | पिता ने | my father |
| पढ़ावा | पढ़ाया | taught |
| समझउँ | मैं समझता था | I would understand |
| सुनउँ | मैं सुनता था | I would listen |
| गुनउँ | मैं मनन करता था | I would reflect |
| नहिं | नहीं | not |
| भावा | अच्छा लगता था | appealed to me |
2 मन ते सकल बासना भागी। केवल राम चरन लय लागी।।
English explanation
All desires departed from my mind; it became absorbed only in Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन | the mind |
| ते | से | from |
| सकल | सभी | all |
| बासना | वासनाएँ; सांसारिक इच्छाएँ | worldly desires |
| भागी | दूर हो गईं | departed |
| केवल | केवल | only |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| लय | तल्लीनता; लगन | absorption; devotion |
| लागी | लग गई | became fixed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1015
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1014, 1016
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।