उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बूझत तिन्हहि राम गुन गाहा। कहहिं सुनउँ हरषित खगनाहा।।
मूल पाठ
बूझत तिन्हहि राम गुन गाहा। कहहिं सुनउँ हरषित खगनाहा।।
सुनत फिरउँ हरि गुन अनुबादा। अब्याहत गति संभु प्रसादा।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 1014, 1016
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे गरुडज़ी! उनसे मैं श्रीरामजीके गुणोंकी कथाएँ पूछता। वे कहते और मैं हर्षित होकर सुनता। इस प्रकार मैं सदा-सर्वदा श्रीहरिके गुणानुवाद सुनता फिरता। शिवजीकी कृपासे मेरी सर्वत्र अबाधित गति थी (अर्थात् मैं जहाँ चाहता वहीं जा सकता था)॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1015 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बूझत तिन्हहि राम गुन गाहा। कहहिं सुनउँ हरषित खगनाहा।।
English explanation
O king of birds, I asked them for accounts of Rama’s virtues; they spoke, and I listened joyfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूझत | पूछता था | would ask |
| तिन्हहि | उन मुनियों से | those sages |
| राम | राम के | of Rama |
| गुन | गुणों की | virtues |
| गाहा | गाथा; कथा | accounts; songs of praise |
| कहहिं | वे कहते थे | they would recount |
| सुनउँ | मैं सुनता था | I would listen |
| हरषित | आनंदित होकर | joyfully |
| खगनाहा | हे पक्षियों के स्वामी गरुड़ | O Garuda, lord of birds |
2 सुनत फिरउँ हरि गुन अनुबादा। अब्याहत गति संभु प्रसादा।।
English explanation
I roamed about listening to accounts of Hari’s virtues; through Shiva’s grace, my movement was unhindered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते हुए | listening |
| फिरउँ | मैं घूमता था | I would wander |
| हरि | भगवान हरि के; यहाँ राम के | of Hari, here Rama |
| गुन | गुणों का | virtues |
| अनुबादा | वर्णन | recounting |
| अब्याहत | बाधारहित | unimpeded |
| गति | गति; विचरण | movement; travel |
| संभु | भगवान शिव की | of Shiva |
| प्रसादा | कृपा से | through grace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1015
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1014, 1016
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।