उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बैनतेय संकर पहिं जाहू। तात अनत पूछहु जनि काहू।।
मूल पाठ
बैनतेय संकर पहिं जाहू। तात अनत पूछहु जनि काहू।।
तहँ होइहि तव संसय हानी। चलेउ बिहंग सुनत बिधि बानी।।
स्रोत अभिलेख 7.6 · पुस्तक पृ. 964, 965
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे गरुड़! तुम शंकरजीके पास जाओ। हे तात! और कहीं किसीसे न पूछना। तुम्हारे सन्देहका नाश वहीं होगा। ब्रह्माजीका वचन सुनते ही गरुड़ चल दिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 965 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बैनतेय संकर पहिं जाहू। तात अनत पूछहु जनि काहू।।
English explanation
Garuda, son of Vinata, go to Shiva. Dear son, do not ask anyone elsewhere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैनतेय | हे विनता के पुत्र गरुड़ | O Garuda, son of Vinata |
| संकर | शंकर अर्थात शिव | Shiva |
| पहिं | के पास | to |
| जाहू | जाओ | go |
| तात | प्रिय पुत्र | dear son |
| अनत | अन्यत्र | elsewhere |
| पूछहु | पूछो | ask |
| जनि | मत | do not |
| काहू | किसी से | anyone |
2 तहँ होइहि तव संसय हानी। चलेउ बिहंग सुनत बिधि बानी।।
English explanation
There your doubt will be dispelled. On hearing Brahma’s words, Garuda set off.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| होइहि | होगी | will occur |
| तव | तुम्हारे | your |
| संसय | संदेह की | of doubt |
| हानी | निवृत्ति | removal |
| चलेउ | चल पड़े | set off |
| बिहंग | पक्षी गरुड़ | Garuda, the bird |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| बिधि | ब्रह्मा की | Brahma’s |
| बानी | वाणी | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 965
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 964, 965
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