उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अग जगमय जग मम उपराजा। नहिं आचरज मोह खगराजा।।
मूल पाठ
अग जगमय जग मम उपराजा। नहिं आचरज मोह खगराजा।।
तब बोले बिधि गिरा सुहाई। जान महेस राम प्रभुताई।।
स्रोत अभिलेख 7.6 · पुस्तक पृ. 964, 965
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह सारा चराचर जगत् तो मेरा रचा हुआ है। जब मैं ही मायावश नाचने लगता हूँ, तब पक्षिराज गरुड़को मोह होना कोई आश्चर्य [की बात] नहीं है। तदनन्तर ब्रह्माजी सुन्दर वाणी बोले— श्रीरामजीकी महिमाको महादेवजी जानते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 965 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अग जगमय जग मम उपराजा। नहिं आचरज मोह खगराजा।।
English explanation
I created the world comprising unmoving and moving beings; the bird-king’s bewilderment is no wonder.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अग | अचल प्राणियों से | with unmoving beings |
| जगमय | चल प्राणियों से युक्त | comprising moving beings |
| जग | संसार | the world |
| मम | मेरे द्वारा | by me |
| उपराजा | रचा गया | created |
| नहिं | नहीं | not |
| आचरज | आश्चर्य | a wonder |
| मोह | मोहग्रस्त होना | being bewildered |
| खगराजा | पक्षिराज गरुड़ का | of Garuda, king of birds |
2 तब बोले बिधि गिरा सुहाई। जान महेस राम प्रभुताई।।
English explanation
Then Brahma spoke in gracious words: Shiva knows Rama’s sovereign greatness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| बोले | बोले | spoke |
| बिधि | ब्रह्मा | Brahma |
| गिरा | वाणी | words |
| सुहाई | मधुर | gracious |
| जान | जानते हैं | knows |
| महेस | महेश अर्थात शिव | Shiva, the great lord |
| राम | राम की | Rama’s |
| प्रभुताई | प्रभुता | sovereign greatness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 965
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 964, 965
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