उत्तरकाण्ड · दोहा 60 · दोहा
परमातुर बिहंगपति आयउ तब मो पास।
परमातुर बिहंगपति आयउ तब मो पास।
जात रहेउँ कुबेर गृह रहिहु उमा कैलास॥ ६०॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.6 · पुस्तक पृ. 964, 965
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1परमातुर बिहंगपति आयउ तब मो पास।
पक्षियों के स्वामी गरुड़ अत्यंत व्याकुल होकर तब मेरे पास आए।
English explanation
Then Garuda, lord of birds, came to me in great distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परमातुर | अत्यंत व्याकुल | greatly distressed |
| बिहंगपति | पक्षियों के स्वामी गरुड़ | Garuda, lord of birds |
| आयउ | आए | came |
| तब | तब; उस समय | then; at that time |
| मो | मेरे | my |
| पास | पास; निकट | near; to the presence of |
2जात रहेउँ कुबेर गृह रहिहु उमा कैलास॥ ६०॥
मैं कुबेर के घर जा रहा था और हे उमा, तुम कैलास पर रह रही थीं।
English explanation
I was on my way to Kubera’s home, while you, Uma, were staying on Mount Kailasa.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जात | जा | going |
| रहेउँ | रहा था | was |
| कुबेर | धन के देवता कुबेर के | of Kubera, the god of wealth |
| गृह | घर; निवास | home; abode |
| रहिहु | तुम रह रही थीं | you were staying |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| कैलास | कैलास पर्वत पर | on Mount Kailasa |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 60
- स्रोत अभिलेख
- 7.6
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 964, 965
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