उत्तरकाण्ड · दोहा 59 · दोहा
अस कहि चले देवरिषि करत राम गुन गान।
अस कहि चले देवरिषि करत राम गुन गान।
हरि माया बल बरनत पुनि पुनि परम सुजान॥ ५९॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.59 · पुस्तक पृ. 963, 964
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अस कहि चले देवरिषि करत राम गुन गान।
एआई-प्रारूप अर्थ: ऐसा कहकर देवर्षि नारद राम के गुणों का गान करते हुए चले गए।
English explanation
AI-draft meaning: Having said this, the divine sage Narada departed, singing Rama’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| चले | चले गए | departed |
| देवरिषि | देवर्षि नारद | the divine sage Narada |
| करत | करते हुए | while performing |
| राम | राम के | of Rama |
| गुन | गुणों का | of the virtues |
| गान | गान | singing |
2हरि माया बल बरनत पुनि पुनि परम सुजान॥ ५९॥
एआई-प्रारूप अर्थ: वे अत्यंत ज्ञानी देवर्षि हरि की माया के बल का बार-बार वर्णन कर रहे थे।
English explanation
AI-draft meaning: The profoundly wise sage repeatedly described the power of Hari’s maya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | हरि की | of Hari, the Lord |
| माया | माया का | of divine maya |
| बल | बल | power |
| बरनत | वर्णन करते हुए | describing |
| पुनि | बार | again |
| पुनि | बार | and again |
| परम | अत्यंत | profoundly |
| सुजान | ज्ञानी देवर्षि | wise sage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 59
- स्रोत अभिलेख
- 7.59
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 963, 964
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