उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिमल ग्यान जल जब सो नहाई। तब रह राम भगति उर छाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[इस प्रकार सब रोगोंसे छूटकर] जब मनुष्य निर्मल ज्ञानरूपी जलमेें स्नान कर लेता है, तब उसके हृदयमें रामभक्ति छा रहती है। शिवजी, ब्रह्माजी, शुकदेवजी, सनकादि और नारद आदि ब्रह्मविचारमें परम निपुण जो मुनि हैं,॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1037 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिमल ग्यान जल जब सो नहाई। तब रह राम भगति उर छाई।।
सिव अज सुक सनकादिक नारद। जे मुनि ब्रह्म बिचार बिसारद।।
स्रोत अभिलेख 7.122 · पुस्तक पृ. 1036, 1038
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिमल ग्यान जल जब सो नहाई। तब रह राम भगति उर छाई।।
English explanation
When one bathes in the water of pure knowledge, devotion to Rama remains spread throughout the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिमल | निर्मल | pure |
| ग्यान | ज्ञानरूपी | of knowledge |
| जल | जल में | in the water |
| जब | जब | when |
| सो | वह | that person |
| नहाई | स्नान करता है | bathes |
| तब | तब | then |
| रह | रहती है | remains |
| राम | राम की | to Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| उर | हृदय में | in the heart |
| छाई | व्याप्त | pervading |
2 सिव अज सुक सनकादिक नारद। जे मुनि ब्रह्म बिचार बिसारद।।
English explanation
Shiva, Brahma, Shukadeva, Sanaka and the other sages, Narada, and the sages skilled in contemplation of Brahman—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | भगवान शिव | Lord Shiva |
| अज | अजन्मा ब्रह्मा | Brahma, the unborn creator |
| सुक | शुकदेव मुनि | the sage Shukadeva |
| सनकादिक | सनक और अन्य कुमार मुनि | Sanaka and the other Kumara sages |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| जे | जो | who |
| मुनि | मुनि | sages |
| ब्रह्म | परम तत्त्व ब्रह्म का | of Brahman, ultimate reality |
| बिचार | चिंतन | contemplation |
| बिसारद | निपुण | skilled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.122
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1037
- सहायक विषय
- भजन-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1036, 1038
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।