उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिनु संतोष न काम नसाहीं। काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं।।
मूल पाठ
बिनु संतोष न काम नसाहीं। काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं।।
राम भजन बिनु मिटहिं कि कामा। थल बिहीन तरु कबहुँ कि जामा।।
स्रोत अभिलेख 7.9 · पुस्तक पृ. 992, 992
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंतोषके बिना कामनाका नाश नहीं होता और कामनाओंके रहते स्वप्रमें भी सुख नहीं हो सकता। और श्रीरामके भजन बिना कामनाएँ कहीं मिट सकती हैं? बिना धरतीके भी कहीं पेड़ उग सकता है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 992 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1बिनु संतोष न काम नसाहीं। काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं।।
English explanation
AI-generated draft meaning: Without contentment, desires do not disappear; while desires remain, there is no happiness even in dreams.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| संतोष | संतुष्टि | contentment |
| न | नहीं | not |
| काम | कामनाएँ | desires |
| नसाहीं | नष्ट होती हैं | disappear |
| काम | कामनाएँ | desires |
| अछत | रहते हुए | while remaining |
| सुख | सुख | happiness |
| सपनेहुँ | सपने में भी | even in dreams |
| नाहीं | नहीं है | does not exist |
2 राम भजन बिनु मिटहिं कि कामा। थल बिहीन तरु कबहुँ कि जामा।।
English explanation
Can desires disappear without devotion to Rama? Can a tree ever grow without ground?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम का | to Lord Rama |
| भजन | भजन और उपासना | devotional worship |
| बिनु | बिना | without |
| मिटहिं | मिटती हैं | disappear |
| कि | क्या | can …? |
| कामा | कामनाएँ | desires |
| थल | भूमि | ground |
| बिहीन | से रहित | devoid of |
| तरु | वृक्ष | a tree |
| कबहुँ | कभी | ever |
| कि | क्या | can …? |
| जामा | उगता है | takes root and grows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 992
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 992, 992
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।