उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहु बिधि मोहि प्रबोधि सुख देई। लगे करन सिसु कौतुक तेई।।
मूल पाठ
बहु बिधि मोहि प्रबोधि सुख देई। लगे करन सिसु कौतुक तेई।।
सजल नयन कछु मुख करि रूखा। चितइ मातु लागी अति भूखा।।
स्रोत अभिलेख 7.88 · पुस्तक पृ. 990, 990
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुझे बहुत प्रकारसे भलीभाँति समझाकर और सुख देकर प्रभु फिर वही बालकोंके खेल करने लगे। नेत्रोंमें जल भरकर और मुखको कुछ रूखा [-सा] बनाकर उन्होंने माताकी ओर देखा— [और मुखाकृति तथा चितवनसे माताको समझा दिया कि] बहुत भूख लगी है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 990 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहु बिधि मोहि प्रबोधि सुख देई। लगे करन सिसु कौतुक तेई।।
English explanation
After reassuring me in many ways and giving me joy, that same Lord began his childlike antics.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| मोहि | मुझे | me |
| प्रबोधि | समझाकर; आश्वस्त करके | having instructed and reassured |
| सुख | सुख | joy |
| देई | देकर | having given |
| लगे | लगे | began |
| करन | करने | to perform |
| सिसु | बालक की | a child’s |
| कौतुक | खेल-चेष्टाएँ | playful antics |
| तेई | वे ही प्रभु | that same Lord |
2 सजल नयन कछु मुख करि रूखा। चितइ मातु लागी अति भूखा।।
English explanation
With tear-filled eyes and a somewhat sullen face, he looks toward his mother; he is very hungry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| नयन | नेत्र | eyes |
| कछु | कुछ; थोड़ा | somewhat |
| मुख | चेहरा | face |
| करि | करके; बनाकर | having made |
| रूखा | रूखा; अप्रसन्न | sullen; displeased |
| चितइ | देखते हैं | he looks toward |
| मातु | माता को | his mother |
| लागी | लगी है | has arisen |
| अति | बहुत | great |
| भूखा | भूख | hunger |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.88
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 990
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 990, 990
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