उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सुख जानइ मन अरु काना। नहिं रसना पहिं जाइ बखाना।।
मूल पाठ
सो सुख जानइ मन अरु काना। नहिं रसना पहिं जाइ बखाना।।
प्रभु सोभा सुख जानहिं नयना। कहि किमि सकहिं तिन्हहि नहिं बयना।।
स्रोत अभिलेख 7.88 · पुस्तक पृ. 990, 990
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह सुख मन और कान ही जानते हैं। जीभसे उसका बखान नहीं किया जा सकता। प्रभुकी शोभाका वह सुख नेत्र ही जानते हैं। पर वे कह कैसे सकते हैं? उनके वाणी तो है नहीं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 990 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो सुख जानइ मन अरु काना। नहिं रसना पहिं जाइ बखाना।।
English explanation
The heart and ears know that joy; the tongue cannot describe it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस | that |
| सुख | सुख को | joy |
| जानइ | जानते हैं | know |
| मन | मन | the heart or mind |
| अरु | और | and |
| काना | कान | ears |
| नहिं | नहीं | not |
| रसना | जीभ | the tongue |
| पहिं | से; के द्वारा | by |
| जाइ | किया जा सकता | can be done |
| बखाना | वर्णन | description |
2 प्रभु सोभा सुख जानहिं नयना। कहि किमि सकहिं तिन्हहि नहिं बयना।।
English explanation
The eyes know the joy of the Lord’s beauty; how can they express it, when they have no speech?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु श्रीराम की | of Lord Rama |
| सोभा | शोभा; सुंदरता | beauty |
| सुख | सुख को | the joy |
| जानहिं | जानती हैं | know |
| नयना | आँखें | the eyes |
| कहि | कह | express |
| किमि | कैसे | how |
| सकहिं | सकती हैं | can they |
| तिन्हहि | उन आँखों को | those eyes have |
| नहिं | नहीं | no |
| बयना | वाणी; बोलने की शक्ति | speech; the power to speak |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.88
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 990
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 990, 990
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