उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कबहूँ काल न ब्यापिहि तोही। सुमिरेसु भजेसु निरंतर मोही।।
मूल पाठ
कबहूँ काल न ब्यापिहि तोही। सुमिरेसु भजेसु निरंतर मोही।।
प्रभु बचनामृत सुनि न अघाऊँ। तनु पुलकित मन अति हरषाऊँ।।
स्रोत अभिलेख 7.88 · पुस्तक पृ. 990, 990
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुझे काल कभी नहीं व्यापेगा। निरन्तर मेरा स्मरण और भजन करते रहना। प्रभुके वचनामृत सुनकर मैं तृप्त नहीं होता था। मेरा शरीर पुलकित था और मनमें मैं अत्यन्त ही हर्षित हो रहा था॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 990 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कबहूँ काल न ब्यापिहि तोही। सुमिरेसु भजेसु निरंतर मोही।।
English explanation
Time and death will never overpower you. Continually remember and worship me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहूँ | कभी भी | ever |
| काल | काल; मृत्यु की शक्ति | time; the power of death |
| न | नहीं | not |
| ब्यापिहि | व्यापेगा; प्रभाव डालेगा | will affect or overpower |
| तोही | तुम्हें | you |
| सुमिरेसु | स्मरण करते रहना | keep remembering |
| भजेसु | भजन करते रहना | keep worshipping |
| निरंतर | लगातार | continually |
| मोही | मुझे; यहाँ श्रीराम को | me; here, Rama |
2 प्रभु बचनामृत सुनि न अघाऊँ। तनु पुलकित मन अति हरषाऊँ।।
English explanation
I cannot have enough of hearing the Lord’s nectar-like words. My body thrills and my heart rejoices greatly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु श्रीराम के | of Lord Rama |
| बचनामृत | अमृत-जैसे वचन | nectar-like words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| न | नहीं | not |
| अघाऊँ | मैं तृप्त होता हूँ | I feel satisfied |
| तनु | शरीर | body |
| पुलकित | रोमांचित | thrilled, with hair standing on end |
| मन | मन | heart or mind |
| अति | अत्यंत | greatly |
| हरषाऊँ | मैं हर्षित होता हूँ | I rejoice |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.88
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 990
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 990, 990
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।