उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बड़ें भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथिन्ह गावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबड़े भाग्यसे यह मनुष्यशरीर मिला है। सब ग्रन्थोंने यही कहा है कि यह शरीर देवताओंको भी दुर्लभ है (कठिनतासे मिलता है)। यह साधनका धाम और मोक्षका दरवाजा है। इसे पाकर भी जिसने परलोक न बना लिया,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 950 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बड़ें भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथिन्ह गावा।।
साधन धाम मोच्छ कर द्वारा। पाइ न जेहिं परलोक सँवारा।।
स्रोत अभिलेख 7.43 · पुस्तक पृ. 950, 950
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बड़ें भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथिन्ह गावा।।
English explanation
Through great good fortune you have obtained a human body. All the scriptures proclaim it rare even for the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बड़ें | बड़े | great |
| भाग | सौभाग्य से | through good fortune |
| मानुष | मनुष्य का | human |
| तनु | शरीर | body |
| पावा | प्राप्त किया है | have obtained |
| सुर | देवताओं के लिए | for the gods |
| दुर्लभ | दुर्लभ | rare to obtain |
| सब | सभी | all |
| ग्रंथिन्ह | ग्रंथों ने | the scriptures |
| गावा | गाया है; महिमा कही है | have proclaimed its glory |
2 साधन धाम मोच्छ कर द्वारा। पाइ न जेहिं परलोक सँवारा।।
English explanation
This body is the abode of spiritual practice and the gateway to liberation. Whoever, having obtained it, has not secured their welfare in the world beyond—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साधन | साधना का | of spiritual practice |
| धाम | धाम; स्थान | abode |
| मोच्छ | मोक्ष | liberation |
| कर | का | of |
| द्वारा | द्वार | gateway |
| पाइ | प्राप्त करके | having obtained it |
| न | नहीं | not |
| जेहिं | जिसने | whoever |
| परलोक | परलोक; मृत्यु के बाद का कल्याण | welfare in the world beyond |
| सँवारा | सुधारा; कल्याण सुनिश्चित किया | secured; set in good order |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 950
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 950, 950
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।