उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ सेवक प्रियतम मम सोई। मम अनुसासन मानै जोई।।
मूल पाठ
सोइ सेवक प्रियतम मम सोई। मम अनुसासन मानै जोई।।
जौं अनीति कछु भाषौं भाई। तौं मोहि बरजहु भय बिसराई।।
स्रोत अभिलेख 7.43 · पुस्तक पृ. 950, 950
भावार्थ
मूल पाठ के बादवही मेरा सेवक है और वही प्रियतम है, जो मेरी आज्ञा माने। हे भाई! यदि मैं कुछ अनीतिकी बात कहूँ तो भय भुलाकर (बेखटके) मुझे रोक देना॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 950 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सोइ सेवक प्रियतम मम सोई। मम अनुसासन मानै जोई।।
English explanation
That person is my servant and dearest to me who follows my instruction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very person |
| सेवक | सेवक | servant |
| प्रियतम | सबसे प्रिय | dearest |
| मम | मेरा; मुझे | my; to me |
| सोई | वही | that same person |
| मम | मेरे | my |
| अनुसासन | अनुशासन या निर्देश को | instruction |
| मानै | मानता है | follows |
| जोई | जो भी | whoever |
2 जौं अनीति कछु भाषौं भाई। तौं मोहि बरजहु भय बिसराई।।
English explanation
Brothers, if I say anything contrary to right conduct, then set aside fear and restrain me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| अनीति | नीति-विरुद्ध बात | something contrary to right conduct |
| कछु | कुछ | anything |
| भाषौं | मैं कहूँ | I say |
| भाई | हे भाइयो | brothers |
| तौं | तो | then |
| मोहि | मुझे | me |
| बरजहु | रोकना | restrain |
| भय | डर | fear |
| बिसराई | भुलाकर; छोड़कर | setting aside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 950
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 950, 950
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।