उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रेमाकुल प्रभु मोहि बिलोकी। निज माया प्रभुता तब रोकी।।
मूल पाठ
प्रेमाकुल प्रभु मोहि बिलोकी। निज माया प्रभुता तब रोकी।।
कर सरोज प्रभु मम सिर धरेऊ। दीनदयाल सकल दुख हरेऊ।।
स्रोत अभिलेख 7.83 · पुस्तक पृ. 985, 986
भावार्थ
मूल पाठ के बादतदनन्तर प्रभुने मुझे प्रेमविह्वल देखकर अपनी मायाकी प्रभुता (प्रभाव) को रोक लिया। प्रभुने अपना कर-कमल मेरे सिरपर रखा। दीनदयालुने मेरा सम्पूर्ण दु:ख हर लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 985 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रेमाकुल प्रभु मोहि बिलोकी। निज माया प्रभुता तब रोकी।।
English explanation
Seeing me overwhelmed with love, the Lord then stopped the display of his maya’s power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेमाकुल | प्रेम से व्याकुल | overwhelmed with love |
| प्रभु | प्रभु राम ने | the Lord Rama |
| मोहि | मुझे | me |
| बिलोकी | देखकर | having seen |
| निज | अपनी | his own |
| माया | माया की | of maya, his wondrous power |
| प्रभुता | सामर्थ्य का प्रदर्शन | display of sovereign power |
| तब | तब | then |
| रोकी | रोक दी | stopped |
2 कर सरोज प्रभु मम सिर धरेऊ। दीनदयाल सकल दुख हरेऊ।।
English explanation
The Lord placed his lotus-like hand on my head; compassionate to the helpless, he removed all my sorrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कर | हाथ | hand |
| सरोज | कमल-समान | lotus-like |
| प्रभु | प्रभु राम ने | the Lord Rama |
| मम | मेरे | my |
| सिर | सिर पर | on the head |
| धरेऊ | रखा | placed |
| दीनदयाल | दीनों पर दया करने वाले | compassionate to the helpless |
| सकल | सभी | all |
| दुख | दुःख | sorrows |
| हरेऊ | दूर कर दिए | removed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.83
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 985
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 985, 986
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।