उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि चरित यह सो प्रभुताई। समुझत देह दसा बिसराई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह [बाल] चरित्र देखकर और [पेटके अंदर देखी हुई] उस प्रभुताका स्मरण कर मैं शरीरकी सुध भूल गया और 'हे आर्तजनोंके रक्षक! रक्षा कीजिये, रक्षा कीजिये पुकारता हुआ पृथ्वीपर गिर पड़ा। मुखसे बात नहीं निकलती थी!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 985 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखि चरित यह सो प्रभुताई। समुझत देह दसा बिसराई।।
धरनि परेउँ मुख आव न बाता। त्राहि त्राहि आरत जन त्राता।।
स्रोत अभिलेख 7.83 · पुस्तक पृ. 985, 986
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि चरित यह सो प्रभुताई। समुझत देह दसा बिसराई।।
English explanation
AI draft: Seeing this wondrous deed and that sovereign power, and reflecting on them, I lost awareness of my body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| चरित | लीला; चरित | deed; divine play |
| यह | यह | this |
| सो | वह | that |
| प्रभुताई | प्रभु की सामर्थ्य और महिमा | the Lord’s sovereign power |
| समुझत | समझते हुए; विचार करते हुए | while understanding; reflecting |
| देह | शरीर की | of the body |
| दसा | अवस्था; सुध | condition; awareness |
| बिसराई | भूल गया | forgot; lost awareness |
2 धरनि परेउँ मुख आव न बाता। त्राहि त्राहि आरत जन त्राता।।
English explanation
I fell to the ground; no words would come from my mouth. O protector of the distressed, save me, save me!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरनि | धरती पर | on the ground |
| परेउँ | मैं गिर पड़ा | I fell |
| मुख | मुख से | from my mouth |
| आव | आती थी; निकलती थी | would come; would emerge |
| न | नहीं | not |
| बाता | बात; वचन | words; speech |
| त्राहि | रक्षा कीजिए | save me |
| त्राहि | रक्षा कीजिए | save me |
| आरत | दुःखी; संकटग्रस्त | distressed; afflicted |
| जन | लोगों के | of people |
| त्राता | हे रक्षक | O protector |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.83
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 985
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 985, 986
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।