उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रीति करहिं जौं तीनिउ भाई। उपजइ सन्यपात दुखदाई।।
मूल पाठ
प्रीति करहिं जौं तीनिउ भाई। उपजइ सन्यपात दुखदाई।।
बिषय मनोरथ दुर्गम नाना। ते सब सूल नाम को जाना।।
स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि कहीं ये तीनों भाई (वात, पित्त और कफ ) प्रीति कर लें (मिल जायँ) तो दु:खदायक सन्निपात रोग उत्पन्न होता है। कठिनतासे प्राप्त (पूर्ण) होनेवाले जो विषयोंके मनोरथ हैं, वे ही सब शूल (कष्टदायक रोग) हैं; उनके नाम कौन जानता है (अर्थात् वे अपार हैं)॥ १६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1035 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रीति करहिं जौं तीनिउ भाई। उपजइ सन्यपात दुखदाई।।
English explanation
Brother, if these three join together, a painful disorder of all three humors arises.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रीति | मेल | union |
| करहिं | करते हैं | form |
| जौं | यदि | if |
| तीनिउ | तीनों ही | all three |
| भाई | हे भाई | O brother |
| उपजइ | उत्पन्न होता है | arises |
| सन्यपात | सन्निपात, तीनों दोषों का विकार | disorder of all three humors |
| दुखदाई | दुःख देनेवाला | painful |
2 बिषय मनोरथ दुर्गम नाना। ते सब सूल नाम को जाना।।
English explanation
The many hard-to-fulfill desires for sense pleasures are all piercing pains; who can know all their names?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिषय | इंद्रिय-विषयों के | for sense pleasures |
| मनोरथ | मन की इच्छाएँ | desires |
| दुर्गम | पूरी करना कठिन | hard to fulfill |
| नाना | अनेक प्रकार की | of many kinds |
| ते | वे | those |
| सब | सभी | all |
| सूल | शूल, तीव्र पीड़ाएँ | piercing pains |
| नाम | नाम | names |
| को | कौन | who |
| जाना | जानता है | knows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1035
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
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