उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ममता दादु कंडु इरषाई। हरष बिषाद गरह बहुताई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दममता दाद है, ईष्र्या (डाह) खुजली है, हर्ष-विषाद गलेके रोगोंकी अधिकता है (गलगंड, कण्ठमाला या घेघा आदि रोग हैं), पराये सुखको देखकर जो जलन होती है, वही क्षयी है। दुष्टता और मनकी कुटिलता ही कोढ़ है॥ १७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1035 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ममता दादु कंडु इरषाई। हरष बिषाद गरह बहुताई।।
पर सुख देखि जरनि सोइ छई। कुष्ट दुष्टता मन कुटिलई।।
स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ममता दादु कंडु इरषाई। हरष बिषाद गरह बहुताई।।
English explanation
Possessive attachment is ringworm, envy is itching, and elation and despondency are manifold afflictions attributed to possessing forces.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ममता | मेरापन, आसक्ति | possessive attachment |
| दादु | दाद का रोग | ringworm |
| कंडु | खुजली | itching |
| इरषाई | ईर्ष्या | envy |
| हरष | हर्ष | elation |
| बिषाद | विषाद | despondency |
| गरह | ग्रह-रोग | afflictions attributed to possessing forces |
| बहुताई | अनेक प्रकार के | manifold |
2 पर सुख देखि जरनि सोइ छई। कुष्ट दुष्टता मन कुटिलई।।
English explanation
Burning at the sight of others’ happiness is consumption; wickedness and crookedness of mind are leprosy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों का | others’ |
| सुख | सुख | happiness |
| देखि | देखकर | seeing |
| जरनि | जलना | burning with envy |
| सोइ | वही | that very thing |
| छई | क्षय रोग | consumption |
| कुष्ट | कुष्ठ रोग | leprosy |
| दुष्टता | दुष्टता | wickedness |
| मन | मन की | of mind |
| कुटिलई | कुटिलता | crookedness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1035
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।