उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूरन काम राम अनुरागी। तुम्ह सम तात न कोउ बड़भागी।।
मूल पाठ
पूरन काम राम अनुरागी। तुम्ह सम तात न कोउ बड़भागी।।
संत बिटप सरिता गिरि धरनी। पर हित हेतु सबन्ह कै करनी।।
स्रोत अभिलेख 7.125 · पुस्तक पृ. 1040, 1040
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप पूर्णकाम हैं और श्रीरामजीके प्रेमी हैं। हे तात! आपके समान कोई बड़भागी नहीं है। संत, वृक्ष, नदी, पर्वत और पृथ्वी—इन सबकी क्रिया पराये हितके लिये ही होती है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1040 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पूरन काम राम अनुरागी। तुम्ह सम तात न कोउ बड़भागी।।
English explanation
Your desires are fulfilled, and you are devoted to Rama; dear one, no one is as fortunate as you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूरन | पूर्ण | fulfilled |
| काम | कामनाएँ | desires |
| राम | श्रीराम के | to Lord Rama |
| अनुरागी | प्रेमी; अनुरक्त | devoted; deeply attached |
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| सम | समान | equal to |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| न | नहीं | not |
| कोउ | कोई | anyone |
| बड़भागी | अत्यंत भाग्यवान | greatly fortunate |
2 संत बिटप सरिता गिरि धरनी। पर हित हेतु सबन्ह कै करनी।।
English explanation
Saints, trees, rivers, mountains, and the earth—all act for the welfare of others.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संत | saints |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| सरिता | नदियाँ | rivers |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| धरनी | पृथ्वी | the earth |
| पर | दूसरों का | of others |
| हित | हित; कल्याण | welfare |
| हेतु | के लिए | for the sake of |
| सबन्ह | इन सबकी | of all these |
| कै | की | possessive marker |
| करनी | करनी; कार्य | conduct; activity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.125
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1040
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1040, 1040
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