उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोह जलधि बोहित तुम्ह भए। मो कहँ नाथ बिबिध सुख दए।।
मूल पाठ
मोह जलधि बोहित तुम्ह भए। मो कहँ नाथ बिबिध सुख दए।।
मो पहिं होइ न प्रति उपकारा। बंदउँ तव पद बारहिं बारा।।
स्रोत अभिलेख 7.125 · पुस्तक पृ. 1040, 1040
भावार्थ
मूल पाठ के बादमोहरूपी समुद्रमें डूबते हुए मेरे लिये आप जहाज हुए। हे नाथ! आपने मुझे बहुत प्रकारके सुख दिये (परम सुखी कर दिया)। मुझसे इसका प्रत्युपकार (उपकारके बदलेमें उपकार) नहीं हो सकता। मैं तो आपके चरणोंकी बार-बार वन्दना ही करता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1040 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोह जलधि बोहित तुम्ह भए। मो कहँ नाथ बिबिध सुख दए।।
English explanation
You became a ship for me upon the ocean of delusion; O master, you gave me many kinds of happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोह | मोह का | of delusion |
| जलधि | समुद्र | ocean |
| बोहित | जहाज; पार कराने वाली नाव | ship; a boat for crossing |
| तुम्ह | तुम | you |
| भए | बने | became |
| मो | मुझ | me |
| कहँ | को | to |
| नाथ | हे नाथ | O master |
| बिबिध | अनेक प्रकार के | various |
| सुख | सुख | joys |
| दए | दिए | gave |
2 मो पहिं होइ न प्रति उपकारा। बंदउँ तव पद बारहिं बारा।।
English explanation
I cannot repay your kindness; I bow at your feet again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मो | मुझ | me |
| पहिं | से | by |
| होइ | हो सकता | can be done |
| न | नहीं | not |
| प्रति | बदले में | in return |
| उपकारा | उपकार | kindness |
| बंदउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| तव | तुम्हारे | your |
| पद | चरण | feet |
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बारा | बार | times; again |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.125
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1040
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1040, 1040
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