उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संत हृदय नवनीत समाना। कहा कबिन्ह परि कहै न जाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसंतोंका हृदय मक्खनके समान होता है, ऐसा कवियोंने कहा है; परन्तु उन्होंने [असली बात] कहना नहीं जाना। क्योंकि मक्खन तो अपनेको ताप मिलनेसे पिघलता है और परम पवित्र संत दूसरोंके दु:खसे पिघल जाते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1040 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
संत हृदय नवनीत समाना। कहा कबिन्ह परि कहै न जाना।।
निज परिताप द्रवइ नवनीता। पर दुख द्रवहिं संत सुपुनीता।।
स्रोत अभिलेख 7.125 · पुस्तक पृ. 1040, 1040
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 संत हृदय नवनीत समाना। कहा कबिन्ह परि कहै न जाना।।
English explanation
Poets have called a saint's heart like butter, but they did not know how to describe it rightly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संत का | of a saint |
| हृदय | हृदय | heart |
| नवनीत | मक्खन के | butter |
| समाना | समान | like |
| कहा | कहा | said; described |
| कबिन्ह | कवियों ने | by poets |
| परि | परंतु | but |
| कहै | कहना; वर्णन करना | to describe |
| न | नहीं | not |
| जाना | जान पाए | knew how |
2 निज परिताप द्रवइ नवनीता। पर दुख द्रवहिं संत सुपुनीता।।
English explanation
Butter melts from heat applied to itself, but deeply pure saints melt at the suffering of others.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | its own |
| परिताप | ताप से | from heat |
| द्रवइ | पिघलता है | melts |
| नवनीता | मक्खन | butter |
| पर | दूसरों के | of others |
| दुख | दुख से | at suffering |
| द्रवहिं | द्रवित होते हैं | are moved; melt |
| संत | संत | saints |
| सुपुनीता | अत्यंत पवित्र | very pure |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.125
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1040
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1040, 1040
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।