उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जीवन जन्म सुफल मम भयऊ। तव प्रसाद संसय सब गयऊ।।
मूल पाठ
जीवन जन्म सुफल मम भयऊ। तव प्रसाद संसय सब गयऊ।।
जानेहु सदा मोहि निज किंकर। पुनि पुनि उमा कहइ बिहंगबर।।
स्रोत अभिलेख 7.125 · पुस्तक पृ. 1040, 1040
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरा जीवन और जन्म सफल हो गया। आपकी कृपासे सब सन्देह चला गया। मुझे सदा अपना दास ही जानियेगा। [शिवजी कहते हैं—] हे उमा! पक्षिश्रेष्ठ गरुडज़ी बार-बार ऐसा कह रहे हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1040 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जीवन जन्म सुफल मम भयऊ। तव प्रसाद संसय सब गयऊ।।
English explanation
My life and birth have become fruitful; through your grace, all my doubts have vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीवन | जीवन | life |
| जन्म | जन्म | birth |
| सुफल | सफल; सार्थक | fruitful; meaningful |
| मम | मेरा | my |
| भयऊ | हो गया | has become |
| तव | तुम्हारी | your |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| संसय | संशय | doubt |
| सब | सारे | all |
| गयऊ | दूर हो गए | vanished |
2 जानेहु सदा मोहि निज किंकर। पुनि पुनि उमा कहइ बिहंगबर।।
English explanation
O Uma, Garuda, foremost among birds, repeatedly says, ‘Always regard me as your own servant.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानेहु | समझना; मानना | regard; consider |
| सदा | सदा | always |
| मोहि | मुझे | me |
| निज | अपना | your own |
| किंकर | सेवक | servant |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| कहइ | कहते हैं | says |
| बिहंगबर | पक्षियों में श्रेष्ठ गरुड़ | Garuda, foremost among birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.125
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1040
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1040, 1040
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।