उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुन्य एक जग महुँ नहिं दूजा। मन क्रम बचन बिप्र पद पूजा।।
मूल पाठ
पुन्य एक जग महुँ नहिं दूजा। मन क्रम बचन बिप्र पद पूजा।।
सानुकूल तेहि पर मुनि देवा। जो तजि कपटु करइ द्विज सेवा।।
स्रोत अभिलेख 7.45 · पुस्तक पृ. 952, 952
भावार्थ
मूल पाठ के बादजगत्में पुण्य एक ही है, [उसके समान] दूसरा नहीं। वह है—मन, कर्म और वचनसे ब्राह्मणोंके चरणोंकी पूजा करना। जो कपटका त्याग करके ब्राह्मणोंकी सेवा करता है, उसपर मुनि और देवता प्रसन्न रहते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 952 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुन्य एक जग महुँ नहिं दूजा। मन क्रम बचन बिप्र पद पूजा।।
English explanation
There is one meritorious act in the world, no other: honoring the feet of Brahmins in thought, deed, and speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुन्य | पुण्यकर्म | meritorious act |
| एक | एक | one |
| जग | जगत | the world |
| महुँ | में | in |
| नहिं | नहीं | not |
| दूजा | दूसरा | another |
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| बिप्र | ब्राह्मणों के | of Brahmins |
| पद | चरणों की | the feet |
| पूजा | पूजा, आदरपूर्ण आराधना | worship, reverent honoring |
2 सानुकूल तेहि पर मुनि देवा। जो तजि कपटु करइ द्विज सेवा।।
English explanation
Sages and deities are favorably disposed toward the person who abandons deceit and serves Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुकूल | अनुकूल, कृपालु | favorably disposed |
| तेहि | उस व्यक्ति | that person |
| पर | पर | toward |
| मुनि | मुनि | sages |
| देवा | देवता | deities |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| कपटु | कपट | deceit |
| करइ | करता है | performs |
| द्विज | ब्राह्मणों की | of Brahmins |
| सेवा | सेवा | service |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 952
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 952, 952
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।