उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि रघुपति बहु बिधि समुझाए। लै पादुका अवधपुर आए।।
मूल पाठ
पुनि रघुपति बहु बिधि समुझाए। लै पादुका अवधपुर आए।।
भरत रहनि सुरपति सुत करनी। प्रभु अरु अत्रि भेंट पुनि बरनी।।
स्रोत अभिलेख 7.65 · पुस्तक पृ. 969, 969
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर श्रीरघुनाथजीने उनको बहुत प्रकारसे समझाया, जिससे वे खड़ाऊँ लेकर अयोध्यापुरी लौट आये, यह सब कथा कही। भरतजीकी नन्दिग्राममें रहनेकी रीति, इन्द्रपुत्र जयन्तकी नीच करनी और फिर प्रभु श्रीरामचन्द्रजी और अत्रिजीका मिलाप वर्णन किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 969 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि रघुपति बहु बिधि समुझाए। लै पादुका अवधपुर आए।।
English explanation
Then Rama counselled Bharata in many ways; Bharata returned to Ayodhya carrying Rama’s sandals.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकारों से | in ways |
| समुझाए | भरत को समझाया | counselled Bharata |
| लै | लेकर | taking; carrying |
| पादुका | राम की चरण-पादुकाएँ | Rama’s sandals |
| अवधपुर | अयोध्या नगर में | to the city of Ayodhya |
| आए | भरत लौट आए | Bharata returned |
2 भरत रहनि सुरपति सुत करनी। प्रभु अरु अत्रि भेंट पुनि बरनी।।
English explanation
He then described Bharata’s way of life, the deed of Indra’s son Jayanta, and the meeting of Lord Rama with the sage Atri.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| रहनि | रहन-सहन; जीवनचर्या | way of life; conduct |
| सुरपति | देवताओं के राजा इंद्र का | of Indra, king of the gods |
| सुत | पुत्र जयंत | son, Jayanta |
| करनी | करनी; किया हुआ कार्य | deed; action |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| अरु | और | and |
| अत्रि | ऋषि अत्रि | the sage Atri |
| भेंट | भेंट; मिलन | meeting |
| पुनि | फिर | then |
| बरनी | वर्णन किया | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.65
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 969
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 969, 969
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।