मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड 7.65
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चौपाई
। ।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिर | then | |
| रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of Raghu’s lineage | |
| अनेक | many | |
| प्रकारों से | in ways | |
| भरत को समझाया | counselled Bharata | |
| लेकर | taking; carrying | |
| राम की चरण-पादुकाएँ | Rama’s sandals | |
| अयोध्या नगर में | to the city of Ayodhya | |
| भरत लौट आए | Bharata returned |
भावार्थ
फिर राम ने भरत को अनेक प्रकार से समझाया; भरत उनकी पादुकाएँ लेकर अयोध्या लौट आए।
Then Rama counselled Bharata in many ways; Bharata returned to Ayodhya carrying Rama’s sandals.
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| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत की | Bharata’s | |
| रहन-सहन; जीवनचर्या | way of life; conduct | |
| देवताओं के राजा इंद्र का | of Indra, king of the gods | |
| पुत्र जयंत | son, Jayanta | |
| करनी; किया हुआ कार्य | deed; action | |
| प्रभु राम | Lord Rama | |
| और | and | |
| ऋषि अत्रि | the sage Atri | |
| भेंट; मिलन | meeting | |
| फिर | then | |
| वर्णन किया | described |
भावार्थ
फिर भरत की जीवनचर्या, इंद्रपुत्र जयंत की करनी और प्रभु राम तथा अत्रि ऋषि की भेंट का वर्णन किया गया।
He then described Bharata’s way of life, the deed of Indra’s son Jayanta, and the meeting of Lord Rama with the sage Atri.
दोहा · पृ. 969
कहि बिराध बध जेहि बिधि देह तजी सरभंग।
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
कहिटिप्पणीएआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप; किसी संस्करण या प्रामाणिक टीका का उद्धरण नहीं। AI-generated draft meanings, not quotations from an edition or authoritative commentary. | कहकर; वर्णन करके | having recounted |
| बिराध | विराध नामक राक्षस का | of the demon Viradha |
| बध | वध | slaying |
जेहिटिप्पणी‘जेहि बिधि’ का संयुक्त अर्थ ‘जिस प्रकार’ है। Together, ‘जेहि बिधि’ means ‘in the manner in which.’ | जिस | in which |
| बिधि | प्रकार | manner |
| देह | शरीर | body |
तजीटिप्पणीस्त्रीलिंग ‘देह’ के अनुरूप भूतकालिक रूप। Past-tense form agreeing with feminine ‘देह.’ | त्याग दिया | relinquished |
सरभंगटिप्पणीदेह त्यागने वाले कर्ता। The subject who relinquished his body. | शरभंग मुनि ने | the sage Sharabhanga |
भावार्थ
विराध के वध और जिस प्रकार शरभंग मुनि ने देह त्यागी, उसका वर्णन करके…
Having recounted Viradha’s slaying and how the sage Sharabhanga relinquished his body…
बरनि सुतीछन प्रीति पुनि प्रभु अगस्ति सतसंग॥ ६५॥
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनि | वर्णन करके | having described |
सुतीछनटिप्पणी‘सुतीछन’ सुतीक्ष्ण नाम का अवधी रूप है। ‘सुतीछन’ is the Awadhi form of the name Sutikshna. | सुतीक्ष्ण मुनि की | of the sage Sutikshna |
| प्रीति | प्रेम; भक्ति-भरी प्रीति | love; loving devotion |
| पुनि | फिर | then |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
अगस्तिटिप्पणी‘अगस्ति’ अगस्त्य ऋषि का नामरूप है। ‘अगस्ति’ is a form of the sage Agastya’s name. | अगस्त्य मुनि के साथ | with the sage Agastya |
| सतसंग | संत-संगति; पवित्र संग | holy fellowship |
भावार्थ
फिर सुतीक्ष्ण मुनि की प्रीति और प्रभु राम का अगस्त्य मुनि के साथ सत्संग वर्णित करके…
Then, having described the sage Sutikshna’s love and Lord Rama’s holy fellowship with the sage Agastya…