उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सचिवागवन नगर नृप मरना। भरतागवन प्रेम बहु बरना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर मन्त्री सुमन्त्रजीका नगरमें लौटना, राजा दशरथजीका मरण, भरतजीका [ननिहालसे] अयोध्यामें आना और उनके प्रेमका बहुत वर्णन किया। राजाकी अन्त्येष्टि क्रिया करके नगरनिवासियोंको साथ लेकर भरतजी वहाँ गये जहाँ सुखकी राशि प्रभु श्रीरामचन्द्रजी थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 969 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सचिवागवन नगर नृप मरना। भरतागवन प्रेम बहु बरना।।
करि नृप क्रिया संग पुरबासी। भरत गए जहँ प्रभु सुख रासी।।
स्रोत अभिलेख 7.65 · पुस्तक पृ. 969, 969
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सचिवागवन नगर नृप मरना। भरतागवन प्रेम बहु बरना।।
English explanation
He described the minister’s return to the city, King Dasharatha’s death, Bharata’s arrival, and Bharata’s love at length.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सचिवागवन | मंत्री सुमंत्र का लौटकर आना | the return of Sumantra, the minister |
| नगर | नगर में; अयोध्या में | to the city, Ayodhya |
| नृप | राजा दशरथ का | of King Dasharatha |
| मरना | मृत्यु होना | death |
| भरतागवन | भरत का आगमन | Bharata’s arrival |
| प्रेम | भरत का प्रेम | Bharata’s love |
| बहु | बहुत; विस्तार से | greatly; at length |
| बरना | वर्णन किया | described |
2 करि नृप क्रिया संग पुरबासी। भरत गए जहँ प्रभु सुख रासी।।
English explanation
After performing King Dasharatha’s funeral rites, Bharata went with the townspeople to where Lord Rama, the embodiment of happiness, was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| नृप | राजा दशरथ की | of King Dasharatha |
| क्रिया | अंत्येष्टि; अंतिम संस्कार | funeral rites |
| संग | साथ | with |
| पुरबासी | नगरवासी | the townspeople |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| गए | गए | went |
| जहँ | जहाँ | where |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सुख | सुख की | of happiness |
| रासी | राशि; भंडार | abundance; repository |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.65
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 969
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 969, 969
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।