उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिपिन गवन केवट अनुरागा। सुरसरि उतरि निवास प्रयागा।।
मूल पाठ
बिपिन गवन केवट अनुरागा। सुरसरि उतरि निवास प्रयागा।।
बालमीक प्रभु मिलन बखाना। चित्रकूट जिमि बसे भगवाना।।
स्रोत अभिलेख 7.65 · पुस्तक पृ. 969, 969
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामका वनगमन, केवटका प्रेम, गङ्गाजीसे पार उतरकर प्रयागमें निवास, वाल्मीकिजी और प्रभु श्रीरामजीका मिलन और जैसे भगवान् चित्रकूटमें बसे, वह सब कहा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 969 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिपिन गवन केवट अनुरागा। सुरसरि उतरि निवास प्रयागा।।
English explanation
The account covered the departure for the forest, the boatman’s affection, crossing the Ganges, and staying at Prayaga.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिपिन | वन की ओर | to the forest |
| गवन | गमन; प्रस्थान | going; departure |
| केवट | नाविक केवट का | of the boatman |
| अनुरागा | प्रेम; अनुराग | love; affection |
| सुरसरि | गंगा नदी | the Ganges River |
| उतरि | पार करके | having crossed |
| निवास | ठहरना; निवास | staying; residence |
| प्रयागा | प्रयाग में | at Prayaga |
2 बालमीक प्रभु मिलन बखाना। चित्रकूट जिमि बसे भगवाना।।
English explanation
He described the meeting of Valmiki and Lord Rama, and how Rama settled at Chitrakuta.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालमीक | ऋषि वाल्मीकि | the sage Valmiki |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| मिलन | भेंट; मिलना | meeting |
| बखाना | वर्णन किया | described |
| चित्रकूट | चित्रकूट में | at Chitrakuta |
| जिमि | जिस प्रकार | how; in the manner that |
| बसे | रहे; निवास किया | dwelt; settled |
| भगवाना | भगवान राम | Lord Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.65
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 969
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 969, 969
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