उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही। बधि कबंध सबरिहि गति दीन्ही।।
मूल पाठ
पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही। बधि कबंध सबरिहि गति दीन्ही।।
बहुरि बिरह बरनत रघुबीरा। जेहि बिधि गए सरोबर तीरा।।
स्रोत अभिलेख 7.66 · पुस्तक पृ. 969, 970
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर प्रभुने गिद्ध जटायुकी जिस प्रकार क्रिया की, कबन्धका वध करके शबरीको परमगति दी और फिर जिस प्रकार विरह-वर्णन करते हुए श्रीरघुवीरजी पंपासरके तीरपर गये, वह सब कहा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 970 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही। बधि कबंध सबरिहि गति दीन्ही।।
English explanation
Then he related how Lord Rama performed Jatayu’s funeral rites, slew Kabandha, and granted Shabari liberation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| गीध | गीध जटायु की | of the vulture Jatayu |
| क्रिया | अंत्येष्टि; अंतिम संस्कार | funeral rites |
| जिमि | जिस प्रकार | how |
| कीन्ही | की | performed |
| बधि | वध करके | having slain |
| कबंध | राक्षस कबंध को | Kabandha, a demon |
| सबरिहि | भक्त शबरी को | to Shabari, the devotee |
| गति | परम गति; मुक्ति | liberation; the highest spiritual state |
| दीन्ही | दी | granted |
2 बहुरि बिरह बरनत रघुबीरा। जेहि बिधि गए सरोबर तीरा।।
English explanation
Next he described Rama’s anguish in separation and how he went to the shore of the lake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | next; again |
| बिरह | वियोग की पीड़ा | anguish of separation |
| बरनत | वर्णन करते हुए; वर्णन किया | describing; recounted |
| रघुबीरा | रघुकुल के वीर राम का | of Rama, hero of Raghu’s lineage |
| जेहि | जिस | which; in which |
| बिधि | प्रकार | manner |
| गए | गए | went |
| सरोबर | सरोवर के | of the lake |
| तीरा | तट पर | to the shore |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 970
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 969, 970
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।