उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परबस जीव स्वबस भगवंता। जीव अनेक एक श्रीकंता।।
मूल पाठ
परबस जीव स्वबस भगवंता। जीव अनेक एक श्रीकंता।।
मुधा भेद जद्यपि कृत माया। बिनु हरि जाइ न कोटि उपाया।।
स्रोत अभिलेख 7.78 · पुस्तक पृ. 981, 981
भावार्थ
मूल पाठ के बादजीव परतन्त्र है, भगवान् स्वतन्त्र हैं; जीव अनेक हैं, श्रीपति भगवान् एक हैं। यद्यपि मायाका किया हुआ यह भेद असत् है तथापि वह भगवान्के भजन बिना करोड़ों उपाय करनेपर भी नहीं जा सकता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 981 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 परबस जीव स्वबस भगवंता। जीव अनेक एक श्रीकंता।।
English explanation
The individual being is subject to another, while God is self-governing and independent. Individual beings are many, but the Lord, Lakshmi’s husband, is one.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परबस | दूसरे के अधीन; पराधीन | subject to another; dependent |
| जीव | जीव | the individual being |
| स्वबस | अपने वश में; स्वतंत्र | self-governing; independent |
| भगवंता | भगवान | God; the Lord |
| जीव | जीव | individual beings |
| अनेक | अनेक | many |
| एक | एक | one |
| श्रीकंता | लक्ष्मी के पति भगवान विष्णु | Vishnu, the husband of Lakshmi |
2 मुधा भेद जद्यपि कृत माया। बिनु हरि जाइ न कोटि उपाया।।
English explanation
Although this distinction is illusory and produced by maya, it does not disappear without Hari, even through countless measures.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुधा | मिथ्या; वास्तविक आधार से रहित | illusory; without an actual basis |
| भेद | भेद; अलगाव | distinction; separation |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| कृत | किया हुआ; उत्पन्न | made; produced |
| माया | माया द्वारा | by maya |
| बिनु | बिना | without |
| हरि | हरि; भगवान | Hari; the Lord |
| जाइ | दूर होता; मिटता | goes away; disappears |
| न | नहीं | not |
| कोटि | करोड़ों; असंख्य | ten million; countless |
| उपाया | उपायों से | through measures or efforts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 981
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 981, 981
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।