उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नित हरि कथा होत जहँ भाई। पठवउँ तहाँ सुनहि तुम्ह जाई।।
मूल पाठ
नित हरि कथा होत जहँ भाई। पठवउँ तहाँ सुनहि तुम्ह जाई।।
जाइहि सुनत सकल संदेहा। राम चरन होइहि अति नेहा।।
स्रोत अभिलेख 7.61 · पुस्तक पृ. 965, 965
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे भाई! जहाँ प्रतिदिन हरिकथा होती है, तुमको मैं वहीं भेजता हूँ, तुम जाकर उसे सुनो। उसे सुनते ही तुम्हारा सब सन्देह दूर हो जायगा और तुम्हें श्रीरामजीके चरणोंमें अत्यन्त प्रेम होगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 965 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नित हरि कथा होत जहँ भाई। पठवउँ तहाँ सुनहि तुम्ह जाई।।
English explanation
Brother, I send you where accounts of Hari are told daily; go there and listen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | नित्य | daily |
| हरि | हरि की (भगवान की) | of Hari (the Lord) |
| कथा | कथा | accounts |
| होत | होती है | are told |
| जहँ | जहाँ | where |
| भाई | हे भाई! | brother! |
| पठवउँ | मैं भेजता हूँ | I send |
| तहाँ | वहाँ | there |
| सुनहि | सुनो | listen |
| तुम्ह | तुम | you |
| जाई | जाकर | having gone |
2 जाइहि सुनत सकल संदेहा। राम चरन होइहि अति नेहा।।
English explanation
As you listen, all doubts will disappear, and deep love for Rama’s feet will arise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइहि | दूर हो जाएँगे | will disappear |
| सुनत | सुनते हुए | while listening |
| सकल | सभी | all |
| संदेहा | संदेह | doubts |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरणों में | for the feet |
| होइहि | हो जाएगा | will arise |
| अति | अत्यंत | deep |
| नेहा | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 965
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 965, 965
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।