उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नित जुग धर्म होहिं सब केरे। हृदयँ राम माया के प्रेरे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीकी मायासे प्रेरित होकर सबके हृदयोंमें सभी युगोंके धर्म नित्य होते रहते हैं। शुद्ध सत्त्वगुण, समता, विज्ञान और मनका प्रसन्न होना, इसे सत्ययुगका प्रभाव जाने॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1006 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नित जुग धर्म होहिं सब केरे। हृदयँ राम माया के प्रेरे।।
सुद्ध सत्व समता बिग्याना। कृत प्रभाव प्रसन्न मन जाना।।
स्रोत अभिलेख 7.104 · पुस्तक पृ. 1006, 1007
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नित जुग धर्म होहिं सब केरे। हृदयँ राम माया के प्रेरे।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Prompted by Rama’s maya, the characteristics of the ages continually arise in everyone’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | सदा | continually |
| जुग | युगों के | of the ages |
| धर्म | स्वभाव और प्रवृत्तियाँ | characteristics and tendencies |
| होहिं | होते रहते हैं | keep arising |
| सब | सभी | everyone |
| केरे | के | of |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| माया | माया | maya, the power of illusion |
| के | से | by |
| प्रेरे | प्रेरित होकर | being prompted |
2 सुद्ध सत्व समता बिग्याना। कृत प्रभाव प्रसन्न मन जाना।।
English explanation
Recognize pure sattva, equanimity, spiritual understanding, and a cheerful mind as the influence of the age of Truth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुद्ध | शुद्ध | pure |
| सत्व | सत्त्वगुण | the quality of clarity and goodness |
| समता | समभाव | equanimity |
| बिग्याना | तत्त्वज्ञान | spiritual understanding |
| कृत | कृतयुग अर्थात सत्ययुग का | of the age of Truth |
| प्रभाव | प्रभाव | influence |
| प्रसन्न | प्रसन्न | cheerful |
| मन | मन | mind |
| जाना | जानो | recognize |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1006
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1006, 1007
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।