उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाना कर्म धर्म ब्रत दाना। संजम दम जप तप मख नाना।।
मूल पाठ
नाना कर्म धर्म ब्रत दाना। संजम दम जप तप मख नाना।।
भूत दया द्विज गुर सेवकाई। बिद्या बिनय बिबेक बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 7.126 · पुस्तक पृ. 1041, 1041
भावार्थ
मूल पाठ के बादअनेकों प्रकारके कर्म, धर्म, व्रत और दान, अनेकों संयम, दम, जप, तप और यज्ञ, प्राणियोंपर दया, ब्राह्मण और गुरुकी सेवा; विद्या, विनय और विवेककी बड़ाई [आदि]—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1041 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाना कर्म धर्म ब्रत दाना। संजम दम जप तप मख नाना।।
English explanation
Various deeds, religious duties, vows, and gifts; restraint, control of the senses, repetition of sacred names or formulas, austerity, and various sacrifices—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | विविध | various |
| कर्म | कर्म; अनुष्ठान | deeds; ritual acts |
| धर्म | धर्माचरण | religious duties |
| ब्रत | व्रत | vows; religious observances |
| दाना | दान | charitable giving |
| संजम | संयम | self-restraint |
| दम | इंद्रियों का दमन | control of the senses |
| जप | नाम या मंत्र का बारंबार उच्चारण | repetition of sacred names or formulas |
| तप | तपस्या | austerity |
| मख | यज्ञ | sacrificial rites |
| नाना | विविध | various |
2 भूत दया द्विज गुर सेवकाई। बिद्या बिनय बिबेक बड़ाई।।
English explanation
Compassion for living beings, service to Brahmins and the spiritual teacher, learning, humility, and excellence in discernment—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूत | जीवों पर | toward living beings |
| दया | दया | compassion |
| द्विज | ब्राह्मणों की | to Brahmins |
| गुर | गुरु की | to the spiritual teacher |
| सेवकाई | सेवा | service |
| बिद्या | विद्या | learning |
| बिनय | विनम्रता | humility |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| बड़ाई | श्रेष्ठता; उत्कृष्टता | excellence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1041
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1041, 1041
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।