उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ लगि साधन बेद बखानी। सब कर फल हरि भगति भवानी।।
मूल पाठ
जहँ लगि साधन बेद बखानी। सब कर फल हरि भगति भवानी।।
सो रघुनाथ भगति श्रुति गाई। राम कृपाँ काहूँ एक पाई।।
स्रोत अभिलेख 7.126 · पुस्तक पृ. 1041, 1041
भावार्थ
मूल पाठ के बादजहाँतक वेदोंने साधन बतलाये हैं, हे भवानी! उन सबका फल श्रीहरिकी भक्ति ही है। किन्तु श्रुतियोंमें गायी हुई वह श्रीरघुनाथजीकी भक्ति श्रीरामजीकी कृपासे किसी एक (विरले) ने ही पायी है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1041 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जहँ लगि साधन बेद बखानी। सब कर फल हरि भगति भवानी।।
English explanation
O Bhavani, devotion to Hari is the fruit of all the spiritual practices described in the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ तक; जितने | as far as; whatever |
| लगि | तक | up to |
| साधन | आध्यात्मिक साधन | spiritual practices |
| बेद | वेदों ने | the Vedas |
| बखानी | वर्णित किए हैं | have described |
| सब | सबका | of all |
| कर | का | of |
| फल | फल; परिणाम | fruit; outcome |
| हरि | भगवान हरि की | to Lord Hari |
| भगति | भक्ति | devotion |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, goddess Parvati |
2 सो रघुनाथ भगति श्रुति गाई। राम कृपाँ काहूँ एक पाई।।
English explanation
That devotion to Rama, Lord of Raghu’s lineage, praised in the Vedas, has been attained by only a rare person through Rama’s grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम की | to Rama, Lord of Raghu’s lineage |
| भगति | भक्ति | devotion |
| श्रुति | वेदों ने | the Vedas |
| गाई | गाई; प्रशंसा की | have sung; praised |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| काहूँ | किसी ने | by someone |
| एक | विरले ही | only a rare one |
| पाई | प्राप्त की है | has attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1041
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1041, 1041
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।