उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मन क्रम बचन जनित अघ जाई। सुनहिं जे कथा श्रवन मन लाई।।
मूल पाठ
मन क्रम बचन जनित अघ जाई। सुनहिं जे कथा श्रवन मन लाई।।
तीर्थाटन साधन समुदाई। जोग बिराग ग्यान निपुनाई।।
स्रोत अभिलेख 7.126 · पुस्तक पृ. 1041, 1041
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो कान और मन लगाकर इस कथाको सुनते हैं, उनके मन, वचन और कर्म (शरीर) से उत्पन्न सब पाप नष्ट हो जाते हैं। तीर्थयात्रा आदि बहुत-से साधन, योग, वैराग्य और ज्ञानमें निपुणता,—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1041 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मन क्रम बचन जनित अघ जाई। सुनहिं जे कथा श्रवन मन लाई।।
English explanation
Those who listen to the narrative with attentive ears and minds lose the sins arising from thought, deed, and speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से | from thought |
| क्रम | कर्म से | from deeds |
| बचन | वचन से | from speech |
| जनित | उत्पन्न | arising |
| अघ | पाप | sin |
| जाई | मिट जाता है | passes away |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| जे | जो लोग | those who |
| कथा | कथा | the narrative |
| श्रवन | कान | ears |
| मन | मन | mind |
| लाई | लगाकर | with attention engaged |
2 तीर्थाटन साधन समुदाई। जोग बिराग ग्यान निपुनाई।।
English explanation
Pilgrimage, the whole range of spiritual practices, and proficiency in yoga, detachment, and knowledge—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तीर्थाटन | तीर्थयात्रा | pilgrimage |
| साधन | आध्यात्मिक साधनों का | of spiritual practices |
| समुदाई | समूह | whole range |
| जोग | योग | yoga; spiritual discipline |
| बिराग | वैराग्य | detachment |
| ग्यान | ज्ञान | spiritual knowledge |
| निपुनाई | निपुणता | proficiency |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1041
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1041, 1041
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।