उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहेउँ परम पुनीत इतिहासा। सुनत श्रवन छूटहिं भव पासा।।
मूल पाठ
कहेउँ परम पुनीत इतिहासा। सुनत श्रवन छूटहिं भव पासा।।
प्रनत कल्पतरु करुना पुंजा। उपजइ प्रीति राम पद कंजा।।
स्रोत अभिलेख 7.126 · पुस्तक पृ. 1041, 1041
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैंने यह परम पवित्र इतिहास कहा, जिसे कानोंसे सुनते ही भवपाश (संसारके बन्धन) छूट जाते हैं और शरणागतोंको [उनके इच्छानुसार फल देनेवाले] कल्पवृक्ष तथा दयाके समूह श्रीरामजीके चरणकमलोंमें प्रेम उत्पन्न होता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1041 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहेउँ परम पुनीत इतिहासा। सुनत श्रवन छूटहिं भव पासा।।
English explanation
AI draft: I have recounted this supremely sacred narrative; on hearing it, the bonds of worldly existence fall away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउँ | मैंने कहा है | I have recounted |
| परम | अत्यंत | supremely |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| इतिहासा | कथा; वृत्तांत | narrative; account |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| श्रवन | कानों से | with the ears |
| छूटहिं | छूट जाते हैं | are released |
| भव | संसार के | of worldly existence |
| पासा | बंधन; फंदे | bonds; snares |
2 प्रनत कल्पतरु करुना पुंजा। उपजइ प्रीति राम पद कंजा।।
English explanation
It awakens love for the lotus feet of Rama, who is a wish-fulfilling tree for those seeking refuge and an embodiment of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रनत | शरण में आए लोगों के लिए | for those seeking refuge |
| कल्पतरु | मनोरथ पूरे करने वाला कल्पवृक्ष | wish-fulfilling tree |
| करुना | करुणा का | of compassion |
| पुंजा | पुंज; साकार भंडार | embodiment; abundance |
| उपजइ | उत्पन्न होता है | arises |
| प्रीति | प्रेम | love |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| कंजा | कमलों में | in the lotuses |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1041
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1041, 1041
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।