उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं। महा प्रलयहुँ नास तव नाहीं।।
मूल पाठ
नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं। महा प्रलयहुँ नास तव नाहीं।।
मुधा बचन नहिं ईस्वर कहई। सोउ मोरें मन संसय अहई।।
स्रोत अभिलेख 7.94 · पुस्तक पृ. 996, 996
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! मैंने शिवजीसे ऐसा सुना है कि महाप्रलयमें भी आपका नाश नहीं होता और ईश्वर (शिवजी) कभी मिथ्या वचन कहते नहीं। वह भी मेरे मनमें सन्देह है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 996 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं। महा प्रलयहुँ नास तव नाहीं।।
English explanation
O lord, I have heard from Shiva that even in the great cosmic dissolution you do not perish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| सुना | सुना है | have heard |
| मैं | मैंने | I |
| अस | ऐसा | thus; this |
| सिव | भगवान शिव | Lord Shiva |
| पाहीं | से, उनके पास | from; in his presence |
| महा | महान | great |
| प्रलयहुँ | प्रलय में भी | even in cosmic dissolution |
| नास | नाश | destruction; perishing |
| तव | तुम्हारा | your |
| नाहीं | नहीं होता | does not occur |
2 मुधा बचन नहिं ईस्वर कहई। सोउ मोरें मन संसय अहई।।
English explanation
Lord Shiva does not speak empty words; even so, I have a doubt about this in my mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुधा | व्यर्थ, निरर्थक | vain; empty |
| बचन | वचन | words; statement |
| नहिं | नहीं | not |
| ईस्वर | ईश्वर, यहाँ शिव | the Lord, here Shiva |
| कहई | कहते हैं | speaks |
| सोउ | उस विषय में भी, फिर भी | about that too; even so |
| मोरें | मेरे | my |
| मन | मन में | in the mind |
| संसय | संदेह | doubt |
| अहई | है | exists; is |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.94
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 996
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 996, 996
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।