उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अग जग जीव नाग नर देवा। नाथ सकल जगु काल कलेवा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[क्योंकि] हे नाथ! नाग, मनुष्य, देवता आदि चर-अचर जीव तथा यह सारा जगत् कालका कलेवा है। असंख्य ब्रह्माण्डोंका नाश करनेवाला काल सदा बड़ा ही अनिवार्य है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 996 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अग जग जीव नाग नर देवा। नाथ सकल जगु काल कलेवा।।
अंड कटाह अमित लय कारी। कालु सदा दुरतिक्रम भारी।।
स्रोत अभिलेख 7.94 · पुस्तक पृ. 996, 996
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अग जग जीव नाग नर देवा। नाथ सकल जगु काल कलेवा।।
English explanation
O lord, immobile and mobile beings, serpents, humans, and gods—the entire world is food for Time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अग | अचर, न चलने वाले | immobile; stationary |
| जग | चर, चलने वाले | mobile; moving |
| जीव | जीव | living beings |
| नाग | नाग, सर्पजाति | serpents; serpent beings |
| नर | मनुष्य | humans |
| देवा | देवता | gods |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| सकल | समस्त | entire |
| जगु | जगत | world |
| काल | काल का | of Time |
| कलेवा | भोजन | food; a meal |
2 अंड कटाह अमित लय कारी। कालु सदा दुरतिक्रम भारी।।
English explanation
Time dissolves countless cosmic eggs; it is always immensely powerful and exceedingly difficult to overcome.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंड | ब्रह्मांडरूपी अंड | cosmic egg |
| कटाह | कटाह, विशाल पात्र | cauldron; vast vessel |
| अमित | असंख्य | countless |
| लय | लय, संहार | dissolution; destruction |
| कारी | करने वाला | causing; bringing about |
| कालु | काल | Time |
| सदा | सदैव | always |
| दुरतिक्रम | जिसे पार करना अत्यंत कठिन हो | exceedingly difficult to overcome |
| भारी | अत्यंत प्रबल | immensely powerful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.94
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 996
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 996, 996
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।