उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नर तन सम नहिं कवनिउ देही। जीव चराचर जाचत तेही।।
मूल पाठ
नर तन सम नहिं कवनिउ देही। जीव चराचर जाचत तेही।।
नरग स्वर्ग अपबर्ग निसेनी। ग्यान बिराग भगति सुभ देनी।।
स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ
मूल पाठ के बादमनुष्य-शरीरके समान कोई शरीर नहीं है। चर-अचर सभी जीव उसकी याचना करते हैं। यह मनुष्य-शरीर नरक, स्वर्ग और मोक्षकी सीढ़ी है तथा कल्याणकारी ज्ञान, वैराग्य और भक्तिको देनेवाला है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1033 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नर तन सम नहिं कवनिउ देही। जीव चराचर जाचत तेही।।
English explanation
No body equals the human body; all moving and stationary beings seek it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | मनुष्य का | human |
| तन | शरीर | body |
| सम | समान | equal to |
| नहिं | नहीं | not |
| कवनिउ | कोई भी | any |
| देही | देह | body |
| जीव | जीव | living beings |
| चराचर | चलनेवाले और स्थिर | moving and stationary |
| जाचत | याचना करते हैं | seek |
| तेही | उसी की | that very one |
2 नरग स्वर्ग अपबर्ग निसेनी। ग्यान बिराग भगति सुभ देनी।।
English explanation
It is a ladder to hell, heaven, or liberation, and bestows knowledge, detachment, and auspicious devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नरग | नरक | hell |
| स्वर्ग | स्वर्ग | heaven |
| अपबर्ग | मोक्ष | liberation |
| निसेनी | सीढ़ी | ladder |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिराग | वैराग्य | detachment |
| भगति | भक्ति | devotion |
| सुभ | शुभ | auspicious |
| देनी | देनेवाली | bestowing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1033
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
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