उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मानस रोग कहहु समुझाई। तुम्ह सर्बग्य कृपा अधिकाई।।
मूल पाठ
मानस रोग कहहु समुझाई। तुम्ह सर्बग्य कृपा अधिकाई।।
तात सुनहु सादर अति प्रीती। मैं संछेप कहउँ यह नीती।।
स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर मानस-रोगोंको समझाकर कहिये। आप सर्वज्ञ हैं और मुझपर आपकी कृपा भी बहुत है। [काकभुशुण्डिजीने कहा—] हे तात! अत्यन्त आदर और प्रेमके साथ सुनिये। मैं यह नीति संक्षेपसे कहता हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1033 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मानस रोग कहहु समुझाई। तुम्ह सर्बग्य कृपा अधिकाई।।
English explanation
Explain the diseases of the mind; you are all-knowing and abundantly gracious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानस | मन के | of the mind |
| रोग | रोग | diseases |
| कहहु | बताइए | please tell |
| समुझाई | समझाकर | with explanation |
| तुम्ह | आप | you |
| सर्बग्य | सब कुछ जाननेवाले | all-knowing |
| कृपा | कृपा | grace |
| अधिकाई | बहुत अधिक | abundant |
2 तात सुनहु सादर अति प्रीती। मैं संछेप कहउँ यह नीती।।
English explanation
Dear one, listen respectfully and with great love; I shall state this teaching briefly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय | dear one |
| सुनहु | सुनो | listen |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| अति | बहुत | great |
| प्रीती | प्रेम से | with love |
| मैं | मैं | I |
| संछेप | संक्षेप में | briefly |
| कहउँ | कहता हूँ | shall tell |
| यह | यह | this |
| नीती | नीति, उपदेश | guiding teaching |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1033
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
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