उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नर तनु भव बारिधि कहुँ बेरो। सन्मुख मरुत अनुग्रह मेरो।।
मूल पाठ
नर तनु भव बारिधि कहुँ बेरो। सन्मुख मरुत अनुग्रह मेरो।।
करनधार सदगुर दृढ़ नावा। दुर्लभ साज सुलभ करि पावा।।
स्रोत अभिलेख 7.44 · पुस्तक पृ. 951, 951
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह मनुष्यका शरीर भवसागर [से तारने] के लिये बेड़ा (जहाज) है। मेरी कृपा ही अनुकूल वायु है। सद्गुरु इस मजबूत जहाजके कर्णधार (खेनेवाले) हैं। इस प्रकार दुर्लभ (कठिनतासे मिलनेवाले) साधन सुलभ होकर (भगवत्कृपासे सहज ही) उसे प्राप्त हो गये हैं,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 951 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नर तनु भव बारिधि कहुँ बेरो। सन्मुख मरुत अनुग्रह मेरो।।
English explanation
The human body is a raft for crossing the ocean of worldly existence, and my grace is the favorable wind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | मानव | human |
| तनु | शरीर | body |
| भव | संसार; जन्म-मरण का अस्तित्व | worldly existence; birth and death |
| बारिधि | सागर | ocean |
| कहुँ | पार करने के लिए | for crossing |
| बेरो | बेड़ा; नाव | raft; boat |
| सन्मुख | अनुकूल | favorable |
| मरुत | हवा | wind |
| अनुग्रह | अनुग्रह; कृपा | grace |
| मेरो | मेरा | my |
2 करनधार सदगुर दृढ़ नावा। दुर्लभ साज सुलभ करि पावा।।
English explanation
The true spiritual teacher is the helmsman, and this body is a sturdy boat. Thus you have received this rare equipment, made readily available.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करनधार | कर्णधार; नाव चलाने वाला | helmsman; steersman |
| सदगुर | सच्चे आध्यात्मिक गुरु | true spiritual teacher |
| दृढ़ | मजबूत | sturdy |
| नावा | नाव | boat |
| दुर्लभ | दुर्लभ; कठिनाई से मिलने वाले | rare; hard to obtain |
| साज | साधन-सामग्री | equipment; means |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily available |
| करि | करके | having made |
| पावा | प्राप्त किया है | have obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 951
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 951, 951
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।